शनिवार, 20 जुलाई 2013

ॐ श्रीराधेगोविन्दाय नमः
हे भक्त्वृन्दों के प्राणप्यारे
नमामि राधे नमामि कृष्णं
तुम्हीं हो माता -पिता हमारे
नमामि राधे नमामि कृष्णं
हे कृपालु
हे दयालु
हे विधाता
प्रभु मैं अपने इस पुस्तक में अनेक और विविध प्रकार के लेख निर्माण कर सकूँ
ऐसा आशीस दीजिये
जाने -अनजाने में कोई त्रुटी होगी
उसके लिए क्षमा की विनती है
हे भक्त धरोहर
अंगीरा प्रसाद तो
आप ही का दास है
जो कुछ घटित होगा वो
आपका विधान है
मैं आरम्भ करता हूँ ये पुस्तक
मुझे आपका सम्मान है
.......जय श्री कृष्णा ........
.......राधे राधे ........
यही हमारा गुणगान है .......
>>>{अंगिरा प्रसाद मौर्या } <<<

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