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बुधवार, 11 दिसंबर 2019
जय श्री राधे
रविवार, 15 सितंबर 2019
समय का जाल और उच्च आकांछाएँ
उम्र निकल जाता है,
धन-धान्य यहीं रह जाता है।
कर्म फल को स्वीकारो मन से,
औरों के कपड़ा भी उतारो तन से,
आने वाली पीढियां पछताती हैं,
गर मारा हुआ धन वो खाती हैं।
आलीशान महल भी केवल नाम का,
जब व्यक्ति ही नहीं सम्मान का !
दुर्योधन का हस्तिनापुर भी हो गया खण्डहर,
उच्च आकांक्षाओं के सपने देखा बुन-बुनकर।
हर युग मे होता समय का चाल प्रबल,
ऐ प्राणी जरा धीरे और संभल के चल।
एक डाली से हजारों माचिस तीलियाँ बनते,
एक तीली के सुलगने पर कई बगीचे जलते।
ऐ प्राणी जरा धीरे और संभल के चल।
हर युग में है समय का जाल प्रबल।
अंगिरा प्रसाद मौर्य।
15/09/2019
शुक्रवार, 8 मार्च 2019
अंतरराष्ट्रीय नारी दिवस
ईश्वर के पश्चात पुरूष सर्वाधिक ऋणी नारी का है, एक तो पृथ्वी पर जीवन के लिए और दूसरा जीवन को जीने योग्य बनाने के लिए।
नारी अचूक है नारी अटूट है, यदि नारी को तोड़ने का प्रयास किया जाय तो भी असफल प्रयास ही किया जा सकता है।
नारी टूटती नहीं किन्तु क्रोधित अवश्य हो जाती है, नारी के क्रोध का कोई सानी नहीं !
नारी से प्रेम करें तो वो अटूट प्रेम करेगी, नारियों में शत्रुता का स्वभाव नहीं होता, किन्तु नारी रूठना भी जानती है।
नारी है तभी इस संसार का महत्व भी है अन्यथा नहीं होता।
अंतरराष्ट्रीय नारी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
जय श्री कृष्ण !
08/03/2019
अंगिरा प्रसाद मौर्य
मंगलवार, 19 फ़रवरी 2019
धर्म और अधर्म
क्या आप जानते हैं धर्म क्या है ?
धार्मिकता क्या होती है ?
यदि नहीं जानते तो अध्ययन कीजिए !
किसी व्यक्ति विशेष अथवा तथाकथित का नाम लेकर धर्म की खिल्ली न उड़ाएं !
पहले तो इस भूल में न रहें कि धर्म के अनेक प्रकार हैं !
धर्म केवल दो प्रकार के होते हैं :- प्रथम- धर्म और पुनश्च- अधर्म ।
भिन्न-भिन्न व्यक्तित्व या भिन्न-भिन्न रिश्तों अथवा भिन्न-भिन्न पदों पर बोलने, सुनने अथवा निर्वहन करने के मायने बदल जाते हैं तो इसका मतलब ये नहीं कि धर्म कई प्रकार के होते हैं ।
जय श्री कृष्ण !
शुक्रवार, 8 फ़रवरी 2019
रिश्ते और शर्तें/धर्म
हर एक रिश्ते के अपने अपने शर्त/धर्म होते हैं !
जैसे : पिता और पुत्र, पिता और पुत्री, माता और पुत्र, माता और पुत्री, भाई और बहन, भाई और भाई, पति और पत्नी, चाचा और भतीजा, कंपनी और अधिकारी, सरकार और नागरिक, धूप और प्राणी, समाज और सामाजिक, नदी और तैराक, समुद्र और नाव, ग्राहक और दुकानदार, दशरथ और राम, राम और लक्ष्मण, भक्त और भगवान इत्यादि !
इनमे से कोई भी अगर शर्तों का पालन नहीं करेगा तो रिश्ते या तो कमजोर हो जाएंगे या फिर टूट जाएंगे !
एक तैराक भी अगर चक्रवात में तैरने की कोशिश करेगा तो चकरी उसे डूबा देगी।
कोई अगर जरूरत से ज्यादा धूप में रहेगा तो उसके लिए भयावह स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
किसी को कंपनी में नौकरी चाहिए तो उसके अनुरूप डिग्री और अनुभव चाहिए अन्यथा नौकरी नहीं मिल सकती, नौकरी मिलने के बाद भी यदि शर्तों का पालन नहीं करते तो या तो पदोन्नति रुक जाती है या निष्कासित कर दिये जाते हैं।
आप भी अपनी शर्तों/धर्म को निभाएं, खुश रहिये, मस्त रहिए।
दिनाँक : 09/02/2019
अंगिरा प्रसाद मौर्य