गुरुवार, 12 जून 2014

जय श्री कृष्ण


तुमको है बताना क्या अब, तुमसे ही छुपाना क्या अब,
जग में तुम्हीं बनवारी, तुमसे भी लजाना क्या अब।

क्या कोई कथाएँ कह दूँ,
या सभी व्यथाएँ कह दूँ,
जी रहा हूँ कैसे-कैसे,
किसकी ये खताएँ कह दूँ,
जग के रक्षापाल तुमही, याद ये कराना क्या अब।
जग में तुम्हीं बनवारी, तुमसे भी लजाना क्या अब।

क्यूँ नहीं बनाते अर्जुन,
क्यूँ नहीं दिलाते वो गुण,
भारत को विश्व बना दूँ,
एक-एक दिशाओं को चुन।
विश्व में विराट तुमही, तो हमें लड़ाना क्या अब।
जग में तुम्हीं बनवारी, तुमसे ही लजाना क्या अब।

कैसे तेरे मार्ग चल दूँ,
कैसे पूरे काज कर दूँ,
जग में बहुत है बाँधा,
बिना मुल्य कैसे हर दूँ,
विश्व में धनाट्य तुमही, तो हमें दौड़ना क्या अब।
जग में तुम्हीं बनवारी, तुमसे भी लजाना क्या अब।

या हमें भुला दे सबकुछ,
या हमें तु दे दे सबकुछ,
क्यूँ यहाँ मैं मूक बैठा,
न देखना वो देखूँ सबकुछ,
दास के हो दाता तुमही, तो हमें रुलाना क्या अब।
जग में तुम्हीं बनवारी, तुमसे ही लजाना क्या अब।
_______जय श्री कृष्ण_______
~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या
दिनाँक___०८/०६/२०१४
असल लेख की पुष्टि यहाँ से

मंगलवार, 10 जून 2014

दहेज


दहेज का किसने प्रथा बनाई,
किसने इसकी की सुनवाई,
जान हजारों जब खतरे में,
देते ना क्यूँ तुम ठुकराई।

एक ठुकराए जग ठुकराए,
ये तो एक व्योहार बड़ा है,
तुमने माँगा जग ने माँगा,
यह इसके आधार पड़ा है।

कोई कहे ये पुत्र की ख्वाहिश,
इसमें हमरी दखल नहीं है,
अरे मूर्खों क्यूँ नहीं कहते,
भिक्षा दो हम सबल नहीं हैं।

एक ही सुर में अब सब गाओ,
क्रांति दहेज़-मुक्ति की लाओ,
भारत में अब ऐसा नारा,
जन-जन ही दिन रात लगाओ।

"मौर्य" प्रतिज्ञा ऐसी कर लो,
देश-प्रेम कण-कण में भर लो,
भारत का संसार सुखी हो,
प्रीति को ऐसी निर्झर कर दो।
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~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या
दिनाँक_________१२/०४/२०१४
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            !!*!!जय हिन्द!!*!!
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जब तक जीवित हैं सुभाष


विश्व में भारत नहीं निराश
जब तक जीवित हैं सुभाष

फौजों का निश्चित विकाश
युवाओं में सदा प्रयास
अखिल विश्व में बड़ा प्रकाश
जब तक जीवित हैं सुभाष

नहीं गुलामी है बर्दाश
हिन्द श्रेष्ठ है पर्दाफास
झुक जाएँ हम ये बकवास
जब तक जीवित हैं सुभाष

नहीं किसी में इतनी हिम्मत
करे हमारी गणना सम्मत
अनोखा अपना है लिबास
जब तक जीवित हैं सुभाष

"मौर्य" अदा क्या कर्ज करेंगे
फिर भी अपना फर्ज करेंगे
हम जहाँ गिरेंगे महाँ विनाश
जब तक जीवित हैं सुभाष।
_____जय हिन्द_____
~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या
दिनाँक- १०/०६/२०१४
अब गूंजेगी हिन्द के सपूत की आवाज

।। हे कान्हा हमको छवि ऐसी प्रदान करें ।।


श्री कृष्ण हरे गोविन्द हरे,
गोपाल हरे जगपाल हरे,
सभी के बिगड़े काम करें,
हम जग में तेरा नाम करें,
हे कान्हा हमको छवि ऐसी प्रदान करें~2बार।।

दिन-रात चलें उपदेश भजें,
हम गीता के ना मार्ग तजें,
हम ऐसा जन-कल्याण करें,
की नाम की तुम्हरे लाज रहे,
हे कान्हा हमको छवि ऐसी प्रदान करें~2बार।।

हम दास रहें या राज करें,
कभि पीड़ा ना संताप भरें,
बस मार्ग वही हर साँस चलें,
की "मौर्य" तुम्हारे काज करें,
हे कान्हा हमको छवि ऐसी प्रदान करें~2बार।।
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_________जय श्री कृष्ण_________
~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या
दिनाँक_________ 02/06/2014
ॐ श्री राधेगोविन्दाय नमः

सोमवार, 9 जून 2014

जहाँ आँकलन हो, हमारा वतन हो।


जमीं हो गगन हो, अमन हो चमन हो,
जहाँ आँकलन हो, हमारा वतन हो,

नए सिलसिले हैं, बढ़े हौंसले हैं,
सभी साथ आओ, यही गीत गाओ,
झुकेंगे नहीं अब,  सर-मेरे कफ़न हो।
जहाँ आँकलन हो, हमारा वतन हो।

हो पहला तिरंगा, मइया जिसकी गंगा,
वर्षों विलग हों, रहती फिर भी चंगा,
ऐसा मेरा भारत, तो कैसे पतन हो।
जहाँ आँकलन हो, हमारा वतन हो।

हम नहीं रुकेंगे, चलेंगे चलेंगे,
माँ के आबरू को, शिखर पे रखेंगे,
जहाँ में ये भारत, सभी का सपन हो।
जहाँ आँकलन हो, हमारा वतन हो।
_______जय हिन्द_______
दिनाँक___०७/०६/२०१४अब गूंजेगी हिन्द के सपूत की आवाज

रविवार, 8 जून 2014

अपनी जिम्मेदारियाँ

जिस दिन आप अपनी जिम्मदारियों को जान लोगे, उस दिन से आपको ये संसार बिखरा बिखरा सा लगने लगेगा।
इसमें संदेह नहीं कि आप उसको सहेजने में जुट जायँ।

शनिवार, 7 जून 2014

दिल ने भी लिखा कुछ

अक्सर वे अपने ना होते, जो अपने हैं रोज बताते,
मात-पिता ही बस अपने हैं, दुख में भी उम्मीद जागते।

कैसी-कैसी छाया देखी, जैसी-तैसी माया देखी,
गुणवानों में अवगुण देखी, प्रीत है झूठी सुन्दर लेखी।

छल उनका कुछ रोज नया है, कपट करन को प्रेम बयाँ है,
नीति की ऐसी व्याख्या करते, क्यूँ मानूं मैं लाज-हया है।

"मौर्य" अडिग हैं अपने मत पर, चन्दन तो चन्दन ही होते,
विष-छाया में उनका जीवन, फिर भी विष को वो ना बोते।

देखी दुनियाँ में अजब कहानी, बीता बचपन मिली जवानी,
माँ-बाप को धक्का जो खड्डे में, बूझे निशदिन नई रवानी,

नई रवानी नौ दिन की है, क्यूँ लिपि को तुम खाक बनाओ,
राह पकड़ के वही चलो तुम, जो बच्चों को मार्ग बताओ।

सेवा जो माँ-बाप का करते, अपना जीवन धन्य बनाते,
"मौर्य" बीज जिसका जो बोये, निश्चय फसल वही हैं पाते।
_______ जय माँ शारदे _______
~~~~~~~~~ अंगिरा प्रसाद मौर्या
दिनाँक___ ०७/०६/२०१४

शुभ प्रभात

अँधेरे का ठिकाना ना रहा, अब प्रकाश ही प्रकाश है।
फिजाओं को बहाना ना रहा, अब झकास ही झकास है।
सूरज की लालिमा भी गई, अब तो उठो यारा,
मौसम का भी क्या कहना, बिंदास ही बिंदास है।
~~~~~~~~~APM

आस का बसेरा हो जो, हर दिन एक सवेरा है

रोज ही उजाला होता, कब यहाँ अँधेरा है,
आस का बसेरा हो जो, हर दिन एक सवेरा है,

कैसा नया साल किसका, बात का बखेड़ा है,
आस का बसेरा हो जो,हर दिन एक सवेरा है,

उसने है पाया सब कुछ, जिसका कोई घेरा है,
आस का बसेरा हो जो, हर दिन एक सवेरा है।

आस है असीमित अपनी, इसलिए तो बेराह है,
आस का बसेरा हो जो, हर दिन एक सवेरा है।

भूख भी तभी आती है, इसका एक असेरा है,
आस का बसेरा हो जो हर दिन एक सवेरा है।

~~~~~~~~~ अंगिरा प्रसाद मौर्य ।

तुम्हें मैं ढूँढता हर पल

मुझे अपनी फिकर देदो,
मुझे अपनी जिकर देदो,
तुम्हें मैं ढूँढता हर पल,
मुझे अपनी खबर देदो।

नहीं मैं हुश्न का मारा,
नहीं मैं इश्क को प्यारा,
नहीं मैं जानता कुछ भी,
कि तुम पर क्यूँ है दिलहारा।

मैं सूरज क्यूँ यहाँ पर हूँ,
यहाँ की चांदनी तुम क्यूँ!
नहीं जब मैं यहाँ रहता,
यहाँ की रौशनी तुम क्यूँ ?

अंधूरा काम जो मेरा,
वो पूरा तुम से होता है।
मुझे तुम क्यूँ नहीं मिलती !
सबेरा जब भी होता है।

सरल हर प्रश्न हैं मेरे,
इन्हें अपनी नजर देदो,
तुम्हें मैं ढूँढता हर पल,
मुझे अपनी खबर देदो।
       ~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्य।
(प्रेम जगत पर सर्वप्रथम प्रकाशित)

मेरे दोस्त

मैं जगता हूँ तो भी याद आते हैं मेरे दोस्त,
मैं सो जाऊँ तो भी याद आते हैं मेरे दोस्त,
मैं कितना भी रूठा हूँ कैसा भी गम हो,
एक पल में जो चुरा लें ऐसे हैं मेरे दोस्त।
~~~~~~~~~APM
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कभी दिल कहता है कि दोस्ती पे ग़ज़ल लिख दूँ,
कभी दिल कहता है कि ये फूलों की फसल लिख दूँ,
फिर भी अँधूरे रह जाते हैं हमारी दोस्ती के मायने,
इसलिए मैंने तय किया कि इसे कुछ और नहीं कमल लिख दूँ।
~~~~~~~~~APM

रविवार, 1 जून 2014

।।हे कान्हा हमको छवि ऐसी प्रदान करें।।

श्री कृष्ण हरे गोविन्द हरे,
गोपाल हरे जगपाल हरे,
सभी के बिगड़े काम करें,
हम जग में तेरा नाम करें,
हे कान्हा हमको छवि ऐसी प्रदान करें~2बार।।

दिन-रात चलें उपदेश भजें,
हम गीता के ना मार्ग तजें,
हम ऐसा जन-कल्याण करें,
की नाम की तुम्हरे लाज रहे,
हे कान्हा हमको छवि ऐसी प्रदान करें~2बार।।

हम दास रहें या राज करें,
कभि पीड़ा ना संताप भरें,
बस मार्ग वही हर साँस चलें,
की "मौर्य" तुम्हारे काज करें,
हे कान्हा हमको छवि ऐसी प्रदान करें~2बार।।
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_________जय श्री कृष्ण_________
~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या
दिनाँक_________ 02/06/2014