मंगलवार, 19 फ़रवरी 2019

धर्म और अधर्म

क्या आप जानते हैं धर्म क्या है ?
धार्मिकता क्या होती है ?
यदि नहीं जानते तो अध्ययन कीजिए !
किसी व्यक्ति विशेष अथवा तथाकथित का नाम लेकर धर्म की खिल्ली न उड़ाएं !

पहले तो इस भूल में न रहें कि धर्म के अनेक प्रकार हैं !
धर्म केवल दो प्रकार के होते हैं :- प्रथम- धर्म और पुनश्च- अधर्म ।

भिन्न-भिन्न व्यक्तित्व या भिन्न-भिन्न रिश्तों अथवा भिन्न-भिन्न पदों पर बोलने, सुनने अथवा निर्वहन करने के मायने बदल जाते हैं तो इसका मतलब ये नहीं कि धर्म कई प्रकार के होते हैं ।

जय श्री कृष्ण !

शुक्रवार, 8 फ़रवरी 2019

रिश्ते और शर्तें/धर्म

हर एक रिश्ते के अपने अपने शर्त/धर्म होते हैं !

जैसे : पिता और पुत्र, पिता और पुत्री, माता और पुत्र, माता और पुत्री, भाई और बहन, भाई और भाई, पति और पत्नी, चाचा और भतीजा, कंपनी और अधिकारी, सरकार और नागरिक, धूप और प्राणी, समाज और सामाजिक, नदी और तैराक, समुद्र और नाव, ग्राहक और दुकानदार, दशरथ और राम, राम और लक्ष्मण, भक्त और भगवान इत्यादि !

इनमे से कोई भी अगर शर्तों का पालन नहीं करेगा तो रिश्ते या तो कमजोर हो जाएंगे या फिर टूट जाएंगे !

एक तैराक भी अगर चक्रवात में तैरने की कोशिश करेगा तो चकरी उसे डूबा देगी।
कोई अगर जरूरत से ज्यादा धूप में रहेगा तो उसके लिए भयावह स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
किसी को कंपनी में नौकरी चाहिए तो उसके अनुरूप डिग्री और अनुभव चाहिए अन्यथा नौकरी नहीं मिल सकती, नौकरी मिलने के बाद भी यदि शर्तों का पालन नहीं करते तो या तो पदोन्नति रुक जाती है या निष्कासित कर दिये जाते हैं।

आप भी अपनी शर्तों/धर्म को निभाएं, खुश रहिये, मस्त रहिए।

दिनाँक : 09/02/2019
अंगिरा प्रसाद मौर्य