रविवार, 30 मार्च 2014

हिन्दू नववर्ष मंगलमय हो

जिसे आप सोचें वो दौड़े चले आयें,
जरूरत ही न आये की आप ही बुलाएँ,
बना रहे नित हर्षोल्लास का वातावरण,
नववर्ष पर मेरी है ऐसी शुभकामनाएं।
~~~~~~~~~APM
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Angira Prasad Maurya

कहाँ कहाँ तक जाऊँ मैं भी, चलते चलते थक जाता हूँ।
नहीं मुड़ुँगा अपने पथ से, खुद से खुद में कह जाता हूँ।

एक दिन आँधी आयी थी यँह, बाकी अब तूफान यहाँ है।
अपने पथ को छोडूंगा नहिं, इतना तो अभिमान भरा है।

संघर्ष समर्पित जीवन मेरा, भले अभी अपमान जनक है।
मंजिल जिस दिन पा जाऊंगा, "मौर्य" यहाँ सम्मान जनक है।

देख हमारी मर्यादा को, खिल्ली निशदिन लोग उड़ाते।
हरिश्चंद की उपमा देकर, मस्ती की तस्वीर बनाते।

फिर भी करता मै सुख का अनुभव, एक पल कोई हँस पाता है।
हम तो अपने मार्ग-प्रखर हैं, इसमें अपना क्या जाता है।

बुधवार, 26 मार्च 2014

हमरी गोपाल स्तुति


सुन हे नंदलाला हे गोपाला' गयिया क्या तुम्हरी अभी नहीं
मईया जेहि जानत रक्ष को ठानत, लीला क्या तुम्हरी रही नहीं

तोहे "मौर्य" बुलावे नित-नित ध्यावे, गयियन पर तुम्हरे भीर पड़ी
अब उनकी चिन्ता करे न जनता, मैं जियन न चाहूँ एक घड़ी

क्यूँ तू नहि आवत धेनु बचावत, चिन्ता कछु हमरी और नहीं
दे दूँ मैं जाना मातु निधाना, एक जान कदाचित बहुत रही

कर दे ठकुराई मातु बचाई,  "मौर्य" की इतनी विनय रही
अब कर प्रभुताई मौर्य दुहाई, लीला क्या तुम्हरी नहीं रही

अब ग्रन्थ-सुजाना रोदन ठाना, त्राहि-त्राहि चहु ओर भई
तेरा गुण गावत क्यूँ दुःख पावत, क्या लीला तुम्हरी रही नहीं।
~~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या
दिनाँक:- २६/०३/२०१४
जय श्री कृष्ण!

सोमवार, 24 मार्च 2014

जय महाकाल


हे त्रिपुरारी हे कैलाशी, कण-कण में प्रभु तुम वासी हो।
तुम जग-हन्ता तुम्हीं नियंता, सृष्टि-जगत में अविनासी हो।

भक्तों के तुम भोले-भाले, ना तुम जानो गोरे-काले,
शरण तुम्हारे जो भी आता, मोक्ष परमपद वह है पाता,

मैं शरणागत प्रभु दास तुम्हारा, यहाँ हमारा नहीं गुजारा,
तुम्ही सुझाओ मार्ग हमें अब, नमन करूँ मै बारम्बारा,

हम सब तो संतान तुम्हारे, जगतपिता तुम सबसे न्यारे,
काम-क्रोध वस रुकना पड़ता, वहाँ से हमको कौन उबारे,

अब दीन-दुखी को कौन दुहाई, तुम्ही तो हमरे हितकारी हो।
तुम जग-हन्ता तुम्ही नियंता, सृष्टि-जगत में अविनाशी हो।
~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या
दिनाँक:-२४/०३/२०१४

शुक्रवार, 21 मार्च 2014

!!*!!जय हिन्द!!*!!

सब के सब यह जान गए हैं, भ्रष्टों का संहार यहाँ है,
राजा मोदी को है बनना, निति-नियम उपहार यहाँ है।

सबकी ही औकात बदल गयी, नमो का अस्त्र चला जाने से
हिन्द-सभ्यता जागेगी फिर, मोदी के ही आ जाने से।

बोली भाषण रूप न देखो, कर्मों का सत्कार यहाँ है,
धन-दौलत की उपमा ही क्या, जन-जन का धिक्कार जहाँ है।

तुम मोदी-चुनना नहीं चूकना, खुशियों का भरमार वहाँ है,
अदल-बदल में तुम न भटको, जन-जन को परहार जहाँ है।

यँह धरना करने से क्या होना, सुमति नहीं सरकार जहाँ है,
अन्ना धरना पर थे बैठे, उन पर भी सत्कार कहाँ है।
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~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या
दिनाँक:- २०/०३/२०१४
~~~~~~~~~Angira Prasad Maurya

बुधवार, 19 मार्च 2014

चहु ओर तिरंगा फहराता मैं


कुछ और यहाँ पर कह जाता मैं
अपने मन की कर पाता मै
पाक कहीं हो चीन कहीं हो
चहु ओर तिरंगा फहराता मैं।

"मौर्य" यहाँ की रीत पुरानी,
सत्कार में बहता गंगा-पानी,
करतार भी हमरी नित गुन गाता,
कुछ चयन यहाँ पर कर पाता मैं।

उनको देखो जनहित जारी,
जेब है उनकी उससे भारी,
यँह करुण न करती भारत माता,
ऐसी निति-प्रखर आता मैं।

सपूत हिन्द क्या एकजुट होंगे,
जातिवाद के नित-नित दंगे,
निति यहाँ तब भ्रष्ट न होती,
ले बना कारवाँ चल पाता मैं।

उनको धन की कमी कहाँ है,
पूरा भारत देश जहाँ है,
एक दिन कुर्सी बदल जाएगी,
ना ऐसी शंका रह पाता यँह।
~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या
दिनाँक:- १९/०३/२०१४
~~~~~~~~~APM
!!*!!जय हिन्द!!*!!
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है मोदी भारत-शान अब, सब मोदी से घबराँय।
भ्रष्टों की हुलिया अब ऐसी, सर्वत्र रहें चिल्लाँय।।
~~~~~~~~~APM
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रविवार, 16 मार्च 2014

जय श्री कृष्ण


किसी यहाँ उल्लास भरा है, किसी यहाँ है मातम रहता,
एक यहाँ उपहास है तेरा, एक यहाँ है वंदन रहता।

प्रभु ये कैसी माया तेरी, धर्म लगाते नित-नित फेरी
भक्तों पर तो साया तेरी, उनकी ही क्यूँ रात अँधेरी,

जो नित तेरी याद में जीता, गम घूँट है हर क्षण पीता,
गम इस दुनियाँ में उसके, लोग चलाते हल हैं मीठा,

देख ये लीला सहम गया हूँ, अब विवेक भी नहीं सहायक,
प्रतिदिन मौज यहाँ वो करते, जो भी होते हैं खलनायक,

दयानिधि तुम हे बनवारी, किंचिद विचलित दृष्टि हमारी,
कृपा करो हे ज्ञान के दाता, बनूँ तुम्हारे आज्ञाकारी,

हमें यहाँ कुछ उल्टा दिखता, किंचिद दृष्टि है तम आधारित,
दिन कटते हैं आस तुम्हारे, होगा एक दिन सत्य भी पारित,

"मौर्य" हृदय भयभीत यहाँ है, मार्ग है उसको नहीं सुझाएँ,
भटक रहा अज्ञान के कारण, ज्ञान यहाँ अब कौन बताये।

एक तुम्हीं जहाँ में हितकारी हो, सबके हिय में गिरधारी हो,
बिगड़ी हमरी कौन बनाये, तुम्हीं जहाँ में बनवारी हो।
>>>>>>>जय श्री कृष्ण<<<<<<<
~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या
दिनाँक:- १६/०३/२०१४
~~~~~~~~~APM

शुक्रवार, 14 मार्च 2014

सुखी लोगों को भी दुख होता है, दूसरे को हँसता देख उनको सहन नहीं होता

सुना कभी था किसी से मैंने, निर्मल पंछी शुभ होता है,
"मौर्य" समय वह बीत चला अब, शुभ से सुख को दुख होता है।

मै अन्जाने एक राह का राही, मार्ग से अपने चलता जाता,
छलते हमको लोग बहुत यँह, "मौर्य" उन्हें ना छलता जाता,
चला बनाने जिसका घर था, उसका उल्टा रुख होता है!
"मौर्य" समय वह बीत चला अब, शुभ से सुख को दुख होता है।

उनकी तुलना मुझ से क्या हो, जिनको "मौर्य" नमन करता है,
ख़ुशी हमारी वो क्या जानें, गम को "मौर्य" गमन करता है,
देख बुलंदी उनको मेरी, दौलत उनका छुप होता है!
"मौर्य" समय वह बीत चला अब, शुभ से सुख को दुख होता है।

नौकर चाकर बहुत हैं उनके, अल्प समय को "मौर्य" वहाँ है,
"मौर्य" वहाँ सम्राट है लेकिन, उनको इसका पता कहाँ है,
देख "मौर्य" की प्रतिभा उनको, पग उनका भी रुक होता है।
"मौर्य" समय वह बीत चला अब, शुभ से सुख को दुख होता है।

"मौर्य" अटल हूँ अपने पथ पर, दुनियाँ मुझको जो बतलाये,
भला हमें उनसे क्या लेना, जो भिक्षु के आगे हाथ बढ़ाएं,
"मौर्य" क्या उनको सिक्षा देगा, जो गैर-हड़प से खुश होता है।
सुना कभी था किसी से मैंने, निर्मल पंछी शुभ होता है,
ऐ "मौर्य" समय वह बीत चला अब, शुभ से सुख को दुख होता है।
~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या
दिनाँक:- १४/०३/२०१४
~~~~~~~~~APM

मंगलवार, 11 मार्च 2014

जय गौ माता


जहाँ तहाँ हो दीनदयाल, हे गोपाल! हे गोपाल!
तुम्हीं हो जग के रक्षापाल, हे गोपाल! हे गोपाल!

जहाँ में तुम्हरी महिमा न्यारी, श्रेष्ठ बताते हैं तृपुरारी,
सृष्टि जगत के पालनहारी, कहते तुमको सब गिरधारी,
गरजो तुम आये भूचाल, हे गोपाल! हे गोपाल!

युद्ध में अर्जुन को समझाए, गीता का उपदेश बताये,
भीष्म-धनुहिया तुम्ही डिगाए, कौरव का विधवंश कराये,
अब भी गणना है विकराल, हे गोपाल! हे गोपाल!

कौरव हैं यँह बड़ी लहेड़ी, मेरे हाथ कर्तव्य की बेड़ी,
अब कार्य यहाँ भी करूँ तो कैसे, घृणित यहाँ कानून बसेरी,
नित माँ का होता यहाँ हलाल, हे गोपाल! हे गोपाल!

नन्द यहाँ नदलाल कहायो, गऊ-चरा गोपाल कहायो,
मार-मधू मधुसूदन तुम हो, दुर्जन को महाकाल बतायो,
फिर धरा पे आओ हे महाकाल! हे गोपाल! हे गोपाल!
~~~~~~~~~APM
दिनाँक:- ०९/०३/२०१४
~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या
>>>>>>>जय गोपाल<<<<<<<

शनिवार, 8 मार्च 2014

जय हिन्द


!!*!!जय हिन्द!!*!!
मुफ्त में देंगे कहने को बस, बना सीढ़ियाँ चढ़ जाते हैं,
सत्ता आने पर फिर देखो, काल ही बन के मडराते हैं।

हमें मुफ्त का नहीं चाहिए, अभी मार्ग बस सही चाहिए,
हमे मुफ्त से क्या लेना है, मेहनत की जो हम खाते हैं।

कर्म-विमुख नहीं होना है अब, ना किसी सहारे सोना है अब,
"मौर्य" हमें उनसे क्या लेना, हैं आज यहाँ कल ढा जाते हैं।

दीन-हीन को कौन दुहाई, करते धनिकों की चटुआई,
असहाय जो हक़ की पाना चाहे, धनिक यहाँ पर गुर्राते हैं।

~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या
दिनाँक:-०७/०३/२०१४
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दोहा:-

भ्रष्टाचार को देख के, अब मोदी हैं बौराय,
सहत-सहत नहीं अब सहे, लियो है अस्त्र उठाय।१।
~~~~~~~~~APM

कण-कण बोले मोदी मोदी, नमो है जब से आय।
भ्रष्ट वहाँ अब त्रस्त हैं, नमो जहाँअब गूँजेगी हिन्द के सपूत की आवाज तक जाय।२।
~~~~~~~~~APM

गुरुवार, 6 मार्च 2014

मेरे कल्प में राम हो राम


मेरे कल्प में राम हो राम
बन जाएँ बिगड़े सब काम
मेरे कल्प में राम हो राम।।

सुने ये दुनियाँ और तमाम
धुने वाल्मीकि उल्टा नाम
करता जिनको जहाँ प्रणाम
मेरे कल्प में राम हो राम।।

नहीं यहाँ कोई बालि सामान
मिटा दिए कलुषी के काम
सुग्रीव-दिलाये उसके धाम
मेरे कल्प में राम हो राम।।

रावण विपदा का एक नाम
बना दिए प्रभु उसका काम
दियो वभीषण को निजधाम
मेरे कल्प में राम हो राम।।

नहीं बड़ा प्रभु मेरो धाम
दृष्टि पड़े अब दयानिधान
विनती करते "मौर्य" सुजान
मेरे कल्प में राम हो राम।।
बन जाएँ बिगड़े सब काम
मेरे कल्प में राम हो राम।।
………जय श्रीराम………
~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या
दिनाँक:-०६/०३/२०१४

हे कान्हा तुम कब आओगे?


हे कान्हा तुम कब आओगे? नहीं सुखद तुम जब पाओगे!
मुरली सुन को हिय है प्यासा, हे कान्हा तुम कब आओगे?

अराजकता की होली होती, तीक्ष्ण व्यंग यँह बोली होती,
देख-सहन अब नहीं ये होता, मनवाँ तेरे खातिर रोता,
तुम्ही प्रेम के रस लाओगे, हे कान्हा तुम कब आओगे?

राजनीति का पार नहीं है, गलत यहाँ व्योहार सही है,
नियम यहाँ अब नहीं कोई, व्याभिचार में दुनियाँ सोई,
नियम धरम तो तुम लाओगे, हे कान्हा तुम कब आओगे?

अपनी विपदा किसे सुनावैं, नहीं यहाँ वह राजा कोई,
मानवता की शंख बजाते, की अन्दर से शोषण होई,
तुम्हीं यहाँ पोषण लाओगे, हे कान्हा तुम कब आओगे?

था सुना देखता सब कुछ तू है, बता भला फिर चुप ही क्यूँ है,
मार्ग पे तेरे चलते हम नित, लुट गया यहाँ सब बचा ही तूँ है,
क्या हमको खुद से बिछड़ाओगे, हे कान्हा तुम कब आओगे?

हे श्याम यहाँ बस आस तुम्हारी, शुरु करो प्रभु लीला न्यारी,
क्षमा करो प्रभु "मौर्य" है विनती, जो कछु त्रुटियाँ होंय हमारी,
अब कितना सबको तड़फाओगे, हे कान्हा तुम कब आओगे?
…………………जय श्री कृष्ण…………………
~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या
दिनाँक:- ०६/०३/२०१४

मंगलवार, 4 मार्च 2014

उपकार-संस्कार (परोपकार)


उपकार की आशा सब करते हैं, विकट समय के आ जाने पर।
उपकार यहाँ पर कौन करे अब, विकट समय के ढा जाने पर।।

लोग यहाँ अब हुए स्वार्थी, अपकार-कर्म है ख्याति निरंजन,
जिसमे जितनी निर्दयता है, उसकी जय है सबका गुंजन।
अब हुआ यहाँ परिवार पराया, हाय रे दौलत हाय रे माया,
समय-चक्र ने ब्याज बढ़ाया, अब कौन हैं अपने-खो जाने पर।।………१।।
।@।उपकार यहाँ पर कौन करे अब,विकट समय के ढा जाने पर।@।

अहम् भाव अब प्रबल है इतना, कौन पुत्र को समझाता है,
शिक्षक अपना कार्य करेंगे, ज्ञान कहाँ हमको आता है,
पितु का अपने किया निरादर, प्रवृत्ति-पुत्र-समा जाता है,
आज पुत्र फिर वही है करता, सिंहासन के पा जाने पर।।………२।।
।@।उपकार यहाँ पर कौन करे अब, विकट समय के ढा जाने पर।@।

पाल-पोष हर बाप है देता, इस भविष्य का ज्ञान सभी को,
धन लायेगा बेटा एक दिन, दौलत आज निदान सभी को,
संस्कार-अबोध क्या धन लायेगा, वो तो खुद में अहम पायेगा,
संस्कार नहीं करे उनका भक्षण, बाल से युवा हो जाने पर।।………३।।
।@।उपकार यहाँ पर कौन करे अब,विकट समय के ढा जाने पर।@।

"मौर्य" जीव-उपकार धरम है, उपकार जहाँ में है सुख-पूजा,
वृक्ष को पानी इंद्र है देता, कर्तव्य है उसका हो खुश दूजा,
सूर्य-चन्द्र जहँ ईश प्रकाशित, तन-मन-धन उपकार बना है,
यहँ अपने बेगाने हो जाते हैं, चन्द-सीढ़ियाँ पा जाने पर।।………४।।
उपकार की आशा सब करते हैं,विकट समय के आ जाने पर।
उपकार यहाँ पर कौन करे अब,विकट समय के ढा जाने पर।।
०४/०३/२०१४
~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या।
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यदि आज का प्रत्येक पिता अपने बच्चों में संस्कार का प्रसार करे तो आने वाली पीढ़ी में मनुष्य-मात्र ही नहीं प्रति-जिव-कल्याण का भाव एवं प्रवृत्ति का उदय अवश्य होगा।
आपका अपने बच्चों को संस्कार प्रदान करना उनपर ही उपकार नहीं अपितु आप स्व्यं पर भी उपकार ही करेंगे।
~~~~~~~~~~आपका शुभचिंतक APM।

अपने निश्चय से आस


निश्चय से एक पुल बांधा हूँ, लक्ष्य अभी तक ना साधा हूँ ,
यहाँ पुर्वज शान के आगे, अभी तलक तो मैं आधा हूँ।

जाना चाहूँ उन से आगे भी, मार्ग जिन्होंने दिया अभी तक,
मौर्य-वंश की व्याख्या क्या है? सम्मान-चक्र यँह पूज्य अभी तक।

अपनी अपनी सब गाते यँह, ये कभी मुझे भी भा जाता है,
"मौर्य" जरा अब आगे देखो, जन-कल्याण समा जाता है।

बौद्ध स्थिती से तुम जागो, ईश बहुत भी गुनिया क्या है,
प्रेम हृदय में परिभाषित है, नहीं विविधता दुनियाँ क्या है।

"मौर्य" कार्य बस वही करेंगे, जिनसे दुनियाँ नित फिर गाये यँह,
वो मार्ग नहीं जहँ ईश न बैठा, जो रूप मिले बस पूजे जाये वँह।।
~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्य
दिनाँक:-०४/०३/२०१४

सोमवार, 3 मार्च 2014

संतोष-जतन


संतोष जहाँ में परम-पुण्य है, जहँ हिंसा का नाम नहीं है,
समय के आगे झुकना पड़ता, बस संतोष मुकाम वहीं है।

लक्ष्य-मार्ग में रुक जाएँ हम, भले जरा सा दुःख पायें हम,
दुःख में दिल को समझाएँ बस, दूरी नहीं निकट आये हम।

मार्ग चुनों तुम जाँच-परख कर, वहाँ पे बाँधा आनी ही है,
समझ-परिक्षा बाँधा को तुम, प्रथम-अंक तो लानी ही है।

"मौर्य" तुफानो में तुम सीखो, खड़े वृक्ष सब टुट जाते हैं,
कोमल जिनकी काया होती, वे ही किंचिद बच पाते हैं।

ना झुकना तुम कर्म के पथ पर, बाँधा किंचिद आ जाए जब,
गम को जितना सह पाओगे, मंजिल उतना गुहराए तब।

"मौर्य" उसे संतोष न समझो, जो की लुटे सदा तुम जाओ,
वर्षों से कोई तुम को लूटे, ईश की ईच्छा तुम ठहराओ।

कर्तव्य ही ईश-नाम है दूजा, लक्ष्मी की रक्षा भी इक पूजा,
कर्तव्य का दूजा रूप धरम है, कर्म भी पूजा धर्म भी पूजा।
~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या
दिनाँक:- ०२/०३/२०१४