किसी यहाँ उल्लास भरा है, किसी यहाँ है मातम रहता,
एक यहाँ उपहास है तेरा, एक यहाँ है वंदन रहता।
प्रभु ये कैसी माया तेरी, धर्म लगाते नित-नित फेरी
भक्तों पर तो साया तेरी, उनकी ही क्यूँ रात अँधेरी,
जो नित तेरी याद में जीता, गम घूँट है हर क्षण पीता,
गम इस दुनियाँ में उसके, लोग चलाते हल हैं मीठा,
देख ये लीला सहम गया हूँ, अब विवेक भी नहीं सहायक,
प्रतिदिन मौज यहाँ वो करते, जो भी होते हैं खलनायक,
दयानिधि तुम हे बनवारी, किंचिद विचलित दृष्टि हमारी,
कृपा करो हे ज्ञान के दाता, बनूँ तुम्हारे आज्ञाकारी,
हमें यहाँ कुछ उल्टा दिखता, किंचिद दृष्टि है तम आधारित,
दिन कटते हैं आस तुम्हारे, होगा एक दिन सत्य भी पारित,
"मौर्य" हृदय भयभीत यहाँ है, मार्ग है उसको नहीं सुझाएँ,
भटक रहा अज्ञान के कारण, ज्ञान यहाँ अब कौन बताये।
एक तुम्हीं जहाँ में हितकारी हो, सबके हिय में गिरधारी हो,
बिगड़ी हमरी कौन बनाये, तुम्हीं जहाँ में बनवारी हो।
>>>>>>>जय श्री कृष्ण<<<<<<<
~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या
दिनाँक:- १६/०३/२०१४
~~~~~~~~~APM
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