मंगलवार, 4 मार्च 2014

उपकार-संस्कार (परोपकार)


उपकार की आशा सब करते हैं, विकट समय के आ जाने पर।
उपकार यहाँ पर कौन करे अब, विकट समय के ढा जाने पर।।

लोग यहाँ अब हुए स्वार्थी, अपकार-कर्म है ख्याति निरंजन,
जिसमे जितनी निर्दयता है, उसकी जय है सबका गुंजन।
अब हुआ यहाँ परिवार पराया, हाय रे दौलत हाय रे माया,
समय-चक्र ने ब्याज बढ़ाया, अब कौन हैं अपने-खो जाने पर।।………१।।
।@।उपकार यहाँ पर कौन करे अब,विकट समय के ढा जाने पर।@।

अहम् भाव अब प्रबल है इतना, कौन पुत्र को समझाता है,
शिक्षक अपना कार्य करेंगे, ज्ञान कहाँ हमको आता है,
पितु का अपने किया निरादर, प्रवृत्ति-पुत्र-समा जाता है,
आज पुत्र फिर वही है करता, सिंहासन के पा जाने पर।।………२।।
।@।उपकार यहाँ पर कौन करे अब, विकट समय के ढा जाने पर।@।

पाल-पोष हर बाप है देता, इस भविष्य का ज्ञान सभी को,
धन लायेगा बेटा एक दिन, दौलत आज निदान सभी को,
संस्कार-अबोध क्या धन लायेगा, वो तो खुद में अहम पायेगा,
संस्कार नहीं करे उनका भक्षण, बाल से युवा हो जाने पर।।………३।।
।@।उपकार यहाँ पर कौन करे अब,विकट समय के ढा जाने पर।@।

"मौर्य" जीव-उपकार धरम है, उपकार जहाँ में है सुख-पूजा,
वृक्ष को पानी इंद्र है देता, कर्तव्य है उसका हो खुश दूजा,
सूर्य-चन्द्र जहँ ईश प्रकाशित, तन-मन-धन उपकार बना है,
यहँ अपने बेगाने हो जाते हैं, चन्द-सीढ़ियाँ पा जाने पर।।………४।।
उपकार की आशा सब करते हैं,विकट समय के आ जाने पर।
उपकार यहाँ पर कौन करे अब,विकट समय के ढा जाने पर।।
०४/०३/२०१४
~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या।
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यदि आज का प्रत्येक पिता अपने बच्चों में संस्कार का प्रसार करे तो आने वाली पीढ़ी में मनुष्य-मात्र ही नहीं प्रति-जिव-कल्याण का भाव एवं प्रवृत्ति का उदय अवश्य होगा।
आपका अपने बच्चों को संस्कार प्रदान करना उनपर ही उपकार नहीं अपितु आप स्व्यं पर भी उपकार ही करेंगे।
~~~~~~~~~~आपका शुभचिंतक APM।

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