मेरी कृतियाँ मेरेलेख (MERI KRITIYAN MERELEKH)
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सोमवार, 13 अप्रैल 2020
दोहे
गुरुवार, 2 अप्रैल 2020
कोरोना वायरस और उसके सिद्धांत
#कोरोना वायरस ने तो बहुत ही बढ़िया नियम निकाला है!
2मिनट लगेंगे यदि नहीं पढ़े तो फिर मौका नहीं मिलेगा !
जैसी करनी वैसी भरनी !
ठीक इसी तरह से अपने स्वाद के लिए मनुष्य पशु-पक्षियों को उनके परिवार से अलग करते थे और बाकियों को पिजड़े में बंद कर देते थे ताकि वो लोग अपने मरते हुए परिजन की रक्षा न कर सकें ! उनकी हत्या करने के बाद उन्हें अपनों से दूर कर देते थे, कोई भी पशु पक्षी अपने हिसाब से अपने परिजन को न तो अंतिम बार देख पाते थे और न ही संस्कार कर पाते थे !
ठीक वही हो रहा है,
कोरोना वायरस जिसको पकड़ता है उसको परिवार से अलग कर देता है, और जब मार देता है तो उससे कोई परिजन मिलने भी नहीं आते हैं ! वैदिक इतिहास में ऐसे प्रमाण मिलते हैं कि जीव कभी कभी स्वयं बदला लेता है ।
मेरे कहने का मतलब ये नहीं है कि आप सरकार के आदेशों का उल्लंघन करें !
मान लो कि रावण ने राम पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया और राम ने ब्रह्मास्त्र के आगे सिर झुका लिया उसे प्रणाम किया और ब्रह्मास्त्र वापस लौट गया।
यदि आपने कभी जीव हत्या नहीं किया, यदि आप ने मांस नहीं खाया और आप कोरोना की शक्ति को चुनौती देंगे तो आपको कोरोना छोड़ नहीं देगा आपके साथ भी वही करेगा जो औरों के साथ कर रहा है।
यदि वैदिक ग्रंथों के हिसाब से देखें तो भी आपने अपने सामने जीव हत्याएं होने दिया, आपने लोगों को माँस खाने से नहीं रोका है तो भी आप अपराधी हैं।
इसलिए किसी भी रूप में आपका अनावश्यक घर से निकलना और कोरोना को हल्के में आँकना आपके और आपके परिवार के लिए नरक का रास्ता खोलने जैसा हो सकता है !
जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरति तिन्ह देखी तैसी।
🙏जय श्री कृष्ण🙏
घर पे रहें, सुरक्षित रहें, स्वस्थ रहें !
धन्यवाद !
आपका शुभचिंतक : अंगिरा प्रसाद मौर्य
दिनाँक : 02/04/2020
बुधवार, 11 दिसंबर 2019
जय श्री राधे
रविवार, 15 सितंबर 2019
समय का जाल और उच्च आकांछाएँ
उम्र निकल जाता है,
धन-धान्य यहीं रह जाता है।
कर्म फल को स्वीकारो मन से,
औरों के कपड़ा भी उतारो तन से,
आने वाली पीढियां पछताती हैं,
गर मारा हुआ धन वो खाती हैं।
आलीशान महल भी केवल नाम का,
जब व्यक्ति ही नहीं सम्मान का !
दुर्योधन का हस्तिनापुर भी हो गया खण्डहर,
उच्च आकांक्षाओं के सपने देखा बुन-बुनकर।
हर युग मे होता समय का चाल प्रबल,
ऐ प्राणी जरा धीरे और संभल के चल।
एक डाली से हजारों माचिस तीलियाँ बनते,
एक तीली के सुलगने पर कई बगीचे जलते।
ऐ प्राणी जरा धीरे और संभल के चल।
हर युग में है समय का जाल प्रबल।
अंगिरा प्रसाद मौर्य।
15/09/2019
शुक्रवार, 8 मार्च 2019
अंतरराष्ट्रीय नारी दिवस
ईश्वर के पश्चात पुरूष सर्वाधिक ऋणी नारी का है, एक तो पृथ्वी पर जीवन के लिए और दूसरा जीवन को जीने योग्य बनाने के लिए।
नारी अचूक है नारी अटूट है, यदि नारी को तोड़ने का प्रयास किया जाय तो भी असफल प्रयास ही किया जा सकता है।
नारी टूटती नहीं किन्तु क्रोधित अवश्य हो जाती है, नारी के क्रोध का कोई सानी नहीं !
नारी से प्रेम करें तो वो अटूट प्रेम करेगी, नारियों में शत्रुता का स्वभाव नहीं होता, किन्तु नारी रूठना भी जानती है।
नारी है तभी इस संसार का महत्व भी है अन्यथा नहीं होता।
अंतरराष्ट्रीय नारी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
जय श्री कृष्ण !
08/03/2019
अंगिरा प्रसाद मौर्य
मंगलवार, 19 फ़रवरी 2019
धर्म और अधर्म
क्या आप जानते हैं धर्म क्या है ?
धार्मिकता क्या होती है ?
यदि नहीं जानते तो अध्ययन कीजिए !
किसी व्यक्ति विशेष अथवा तथाकथित का नाम लेकर धर्म की खिल्ली न उड़ाएं !
पहले तो इस भूल में न रहें कि धर्म के अनेक प्रकार हैं !
धर्म केवल दो प्रकार के होते हैं :- प्रथम- धर्म और पुनश्च- अधर्म ।
भिन्न-भिन्न व्यक्तित्व या भिन्न-भिन्न रिश्तों अथवा भिन्न-भिन्न पदों पर बोलने, सुनने अथवा निर्वहन करने के मायने बदल जाते हैं तो इसका मतलब ये नहीं कि धर्म कई प्रकार के होते हैं ।
जय श्री कृष्ण !
शुक्रवार, 8 फ़रवरी 2019
रिश्ते और शर्तें/धर्म
हर एक रिश्ते के अपने अपने शर्त/धर्म होते हैं !
जैसे : पिता और पुत्र, पिता और पुत्री, माता और पुत्र, माता और पुत्री, भाई और बहन, भाई और भाई, पति और पत्नी, चाचा और भतीजा, कंपनी और अधिकारी, सरकार और नागरिक, धूप और प्राणी, समाज और सामाजिक, नदी और तैराक, समुद्र और नाव, ग्राहक और दुकानदार, दशरथ और राम, राम और लक्ष्मण, भक्त और भगवान इत्यादि !
इनमे से कोई भी अगर शर्तों का पालन नहीं करेगा तो रिश्ते या तो कमजोर हो जाएंगे या फिर टूट जाएंगे !
एक तैराक भी अगर चक्रवात में तैरने की कोशिश करेगा तो चकरी उसे डूबा देगी।
कोई अगर जरूरत से ज्यादा धूप में रहेगा तो उसके लिए भयावह स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
किसी को कंपनी में नौकरी चाहिए तो उसके अनुरूप डिग्री और अनुभव चाहिए अन्यथा नौकरी नहीं मिल सकती, नौकरी मिलने के बाद भी यदि शर्तों का पालन नहीं करते तो या तो पदोन्नति रुक जाती है या निष्कासित कर दिये जाते हैं।
आप भी अपनी शर्तों/धर्म को निभाएं, खुश रहिये, मस्त रहिए।
दिनाँक : 09/02/2019
अंगिरा प्रसाद मौर्य