तनहा जब होना तो हमें याद कर लेना वो अपने,
अक्सर दोस्तों को बिछड़ा दिया करते हैं गैरों के सपने,
बिछड़ने से तो आपकी तक़दीर नहीं बदल जायेगी ऐ दोस्त,
रही दोस्ती गर कुछ भी ना मिला तो भी तो हैं अपने।
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रात की शुभकामनायें दे रहा हूँ, कल फिर मिलना तुम,
भौरें आयें न आयें, पंछियाँ गाएँ न गाएँ, ऐ "दोस्त", कल फिर खिलना तुम।
~~~~~~~~~APM
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मंगलवार, 27 मई 2014
शुभ रात्री
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