शुक्रवार, 30 मई 2014

शुभ संध्या

रुत आयी फिर एक सुनहरी,
धूप गयी अब छाँव है लहरी,

करती सबका ये अभिनंदन,
मित्र-बंधु को संध्या वंदन।
~~~~~~~~~APM

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

कृपया अपनी छवि स्वयं न ख़राब करें /-
अभद्र टिप्पणियों से बचें /-