रुत आयी फिर एक सुनहरी,
धूप गयी अब छाँव है लहरी,
करती सबका ये अभिनंदन,
मित्र-बंधु को संध्या वंदन।
~~~~~~~~~APM
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रुत आयी फिर एक सुनहरी,
धूप गयी अब छाँव है लहरी,
करती सबका ये अभिनंदन,
मित्र-बंधु को संध्या वंदन।
~~~~~~~~~APM
तनहा जब होना तो हमें याद कर लेना वो अपने,
अक्सर दोस्तों को बिछड़ा दिया करते हैं गैरों के सपने,
बिछड़ने से तो आपकी तक़दीर नहीं बदल जायेगी ऐ दोस्त,
रही दोस्ती गर कुछ भी ना मिला तो भी तो हैं अपने।
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रात की शुभकामनायें दे रहा हूँ, कल फिर मिलना तुम,
भौरें आयें न आयें, पंछियाँ गाएँ न गाएँ, ऐ "दोस्त", कल फिर खिलना तुम।
~~~~~~~~~APM
पूरब से आ रहा है कोई जाग जाओ अब,
खुशियाँ ला रहा है कोई जाग जाओ अब,
उदित हों आज से पूरे भारत में सदभावनाएँ,
सभी मित्रों को हैं ऐसी अनंत शुभकामनायें,
न चाहो उसे तुम जरूरत से ज्यादा,
कभी भी ओ खो जाए, रहो फिर भी आधा।
सूरत पे जाना ना तुम,
होना ना अदाओं पे गुम,
दौलत वो कैसी भी हो,
कुछ तो करना वादा, फिर भी करना वादा।।
न चाहो_______________फिर भी आधा।
एक ही तमन्ना रखना,
कदमों पे अपने चलना,
औरों का सहारा जब तक,
तब तक हो आधा, तभी तक है बाँधा।
न चाहो_______________फिर भी आधा।
दरिया में कूदा जो है,
थोड़ा सा भी डूबा जो है,
उसी ने उछाल मारा,
तैरन को साधा, बैरन को साधा।।
न चाहो_______________फिर भी आधा।
…………………………………१९/०५/२०१४
_________अंगिरा प्रसाद मौर्या।
बैरन_____=_____दुश्मन/शत्रु।
"यदि किसी को तैरना न आता हो तो गहरे तालाब,पोखरे एवं नदियाँ उसके लिए शत्रु के समान हैं।
और बिना इनमे घुसे तैरना भी नहीं आ सकता।
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तात्पर्य यह है कि किसी भी वस्तु, तत्व, व्यक्ति अथवा और भी कोई संज्ञा सर्वनाम हो, उतना ही शत्रु मानों जितना कि उचित हो। और उतना ही मित्र मानो,जिससे बिना उसके जिंदगी पूरी उदास न हो।
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!!*!!जय हिन्द!!*!!
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सतकरम करते रहो तुम, निज धरम चलते रहो तुम।
एक ऐसा चट्टान बनों तुम, अपनों का अभिमान बनों तुम।
डूबा सूरज फिर आएगा, नई सुबह फिर से लायेगा।
तुम यहाँ नहिं फिर आओगे, बाट वही कैसे जाओगे।
समझ यही सज्ञान बनो तुम, अपनों का अभिमान बनों तुम।
बीता बचपन मिली जवानी, सुरु यहीं से हुई कहानी।
लोग हुए फिल्मों के मारे, पर्दे-पीछे झूठे तारे।
ना कोई झूठी शान बनो तुम, अपनों का अभिमान बनों तुम।
गीत गाऊँ मैं सुनाऊँ,
ज़िन्दगी एहसास क्या,
क्या बताऊँ क्या बताऊँ,
कौन दूजा खास क्या।
अपने मद में सब भरे हैं,
कहने को तो बड़े खरे हैं,
झूठे करम अंदाज क्या,
क्या बताऊँ क्या बताऊँ,
कौन दूजा खास क्या।
प्यास लगे तो नदियाँ हमारी,
बाढ़ गयी तो बड़ी बीमारी,
कैसी माया राज क्या,
क्या बताऊँ क्या बताऊँ,
कौन दूजा खास क्या।