न चाहो उसे तुम जरूरत से ज्यादा,
कभी भी ओ खो जाए, रहो फिर भी आधा।
सूरत पे जाना ना तुम,
होना ना अदाओं पे गुम,
दौलत वो कैसी भी हो,
कुछ तो करना वादा, फिर भी करना वादा।।
न चाहो_______________फिर भी आधा।
एक ही तमन्ना रखना,
कदमों पे अपने चलना,
औरों का सहारा जब तक,
तब तक हो आधा, तभी तक है बाँधा।
न चाहो_______________फिर भी आधा।
दरिया में कूदा जो है,
थोड़ा सा भी डूबा जो है,
उसी ने उछाल मारा,
तैरन को साधा, बैरन को साधा।।
न चाहो_______________फिर भी आधा।
…………………………………१९/०५/२०१४
_________अंगिरा प्रसाद मौर्या।
बैरन_____=_____दुश्मन/शत्रु।
"यदि किसी को तैरना न आता हो तो गहरे तालाब,पोखरे एवं नदियाँ उसके लिए शत्रु के समान हैं।
और बिना इनमे घुसे तैरना भी नहीं आ सकता।
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तात्पर्य यह है कि किसी भी वस्तु, तत्व, व्यक्ति अथवा और भी कोई संज्ञा सर्वनाम हो, उतना ही शत्रु मानों जितना कि उचित हो। और उतना ही मित्र मानो,जिससे बिना उसके जिंदगी पूरी उदास न हो।
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!!*!!जय हिन्द!!*!!
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