शुक्रवार, 14 मार्च 2014

सुखी लोगों को भी दुख होता है, दूसरे को हँसता देख उनको सहन नहीं होता

सुना कभी था किसी से मैंने, निर्मल पंछी शुभ होता है,
"मौर्य" समय वह बीत चला अब, शुभ से सुख को दुख होता है।

मै अन्जाने एक राह का राही, मार्ग से अपने चलता जाता,
छलते हमको लोग बहुत यँह, "मौर्य" उन्हें ना छलता जाता,
चला बनाने जिसका घर था, उसका उल्टा रुख होता है!
"मौर्य" समय वह बीत चला अब, शुभ से सुख को दुख होता है।

उनकी तुलना मुझ से क्या हो, जिनको "मौर्य" नमन करता है,
ख़ुशी हमारी वो क्या जानें, गम को "मौर्य" गमन करता है,
देख बुलंदी उनको मेरी, दौलत उनका छुप होता है!
"मौर्य" समय वह बीत चला अब, शुभ से सुख को दुख होता है।

नौकर चाकर बहुत हैं उनके, अल्प समय को "मौर्य" वहाँ है,
"मौर्य" वहाँ सम्राट है लेकिन, उनको इसका पता कहाँ है,
देख "मौर्य" की प्रतिभा उनको, पग उनका भी रुक होता है।
"मौर्य" समय वह बीत चला अब, शुभ से सुख को दुख होता है।

"मौर्य" अटल हूँ अपने पथ पर, दुनियाँ मुझको जो बतलाये,
भला हमें उनसे क्या लेना, जो भिक्षु के आगे हाथ बढ़ाएं,
"मौर्य" क्या उनको सिक्षा देगा, जो गैर-हड़प से खुश होता है।
सुना कभी था किसी से मैंने, निर्मल पंछी शुभ होता है,
ऐ "मौर्य" समय वह बीत चला अब, शुभ से सुख को दुख होता है।
~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या
दिनाँक:- १४/०३/२०१४
~~~~~~~~~APM

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

कृपया अपनी छवि स्वयं न ख़राब करें /-
अभद्र टिप्पणियों से बचें /-