मैं जगता हूँ तो भी याद आते हैं मेरे दोस्त,
मैं सो जाऊँ तो भी याद आते हैं मेरे दोस्त,
मैं कितना भी रूठा हूँ कैसा भी गम हो,
एक पल में जो चुरा लें ऐसे हैं मेरे दोस्त।
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कभी दिल कहता है कि दोस्ती पे ग़ज़ल लिख दूँ,
कभी दिल कहता है कि ये फूलों की फसल लिख दूँ,
फिर भी अँधूरे रह जाते हैं हमारी दोस्ती के मायने,
इसलिए मैंने तय किया कि इसे कुछ और नहीं कमल लिख दूँ।
~~~~~~~~~APM
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शनिवार, 7 जून 2014
मेरे दोस्त
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