शनिवार, 20 जुलाई 2013

>>>{जय श्रीकृष्णा}<<<
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तारे छा गये हैं आसमाँ में
नींद अब हमें बुला रही है
है यहि दिल के अरमाँ में
लफ्जों मे अब आवाज सी आ रही है
कि हम दोस्त चन्द
समय के लिए बिछड़ रहे है
पर कल फिर हर्सोल्लास के
नव-सूरज का अह्वान कर रहें हैं
सितारों को भेज रहा हूँ
आपको सुलाने के लिए
चाँद भी जा रहे हैं
खिस्से सुनाने के लिए
खो जाओ प्यारे सपनों में
नींद अब हमें बुला रही है
सुबह सूरज से आग्रह किया हूँ
आएंगे आपको जगाने के लिए
>>>शुभ्-रात्रि<<<
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>>>{जय श्रीकृष्णा}<<<
>>>{अंगिरा प्रसाद मौर्या}<<<

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