शनिवार, 20 जुलाई 2013

होली पर मेरी एक छोटी सी रचना<<<<<<<
है होली भारत का एक प्रमुख और अनुपम त्यौहार-
प्रतिपल खिलता विभिन्न रंगों से यहाँ बहार -
परम्पराओं की भी सीमा है तुम न करना अत्याचार -
है पर्व ये प्रेम-विखेरन सो बिखेरो पाओ प्रेम अपार-
इस दिन तो मानो रंगों से रंग जाता सारा संसार -
माना जाता होलिका और प्रहलाद को इसका आधार -
बीत रहा ये सत्र और होता नव-सत्र का प्रसार
एवं मनु का जन्मदिवस ये सब भी हैं इसीके आसार -
अब त्यागो कटुताएं मन में लाओ नव-बहार -
होगा जब भाई-चारा तभी है सुखी ये सार संसार -
~~~~~~~~~ अंगिरा प्रसाद मौर्या
जय श्री कृष्णा ! जय हिन्द ! जय माँ भारती

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