जो पूर्ण है वही अपना निश्चित परिचय दे सकता है। वह मनुष्य अपूर्ण से ज्यादा और क्या हो सकता है, "जो न जाने कब कहाँ बहक जाए/भटक जाए। >>>मैं एक मनुष्य हूँ। इससे ज्यादा मेरा और कोई परिचय नहीं है। इसी में पूर्णता है। और यही मेरी पूरी पहचान है।<<<>>>जय श्री कृष्ण<<<
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