बुधवार, 26 फ़रवरी 2014

ममता


धरा पे ममता जहाँ नहीं हैं, खुशियों का आसार नहीं है,
करती ममता वास जहाँ पर, प्रेम वही है प्यार वहीं है।

वहाँ पे निशदिन शोक मनाते, घृणा-द्वेष भी जहाँ कहीं है,
मातु-पिता जहँ पूजे जाते, खुशियों का भंडार वहीँ है।

निति नहीं है जिस दुनियाँ में, बाधाओं का तार वहीं हैं,
अहम भाव है जहाँ पनपता, अपमान वहीँ उपहास वहीँ है।

गुरु है माता पिता गुरु है, किंचिद यहाँ विकार नहीं है,
मातु-पिता जहँ पूजे जाते, खुशियों का वहँ सार नहीं है।

"मौर्य" कहत श्रृंगार जिसे वह, मन में बैठा शाप नहीं है,
जन-जन में हो भाईचारा, अलंकार वही श्रृंगार वहीँ है।

समय के चलते सब झुक जाते, किसी को कुछ की प्यास नहीं है,
झुक जाये ममता अगर अचानक, तो दुनियाँ भी कम्पास नहीं ह।
~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या
~~~~~~~~~ Angira Prasad Maurya
दिनांक:- २६/०२/२०१४
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यहाँ पर शाप का आशय श्राप(दूसरे पर उपकार ना करके तिरस्कृत करना अथवा उसको हानि पहुचाने की योजना बनाना) से है
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कम्पास:- कम्पास का आशय उस डिवाइडर से है जिसमे ममता का पेन्सिल बाँध कर यह दुनियाँ अपनी गति पर गतिमान है।
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जय श्री कृष्णा
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