अँधूरा फिर भी रहता है,
मैं पूरी बात कहता हूँ।
तेरे ही स्वप्न में जाकर,
मैं पूरी रात रहता हूँ।
तुम मुझसे दूर जाती हो,
ये हरगिज सह नहीं सकता।
मैं तुमसे प्यार करता हूँ,
मैं तुम बिन रह नहीं सकता।
तुम मीलों दूर होती हो,
मैं तुमसे बात करता हूँ।
तेरे ही स्वप्न में जाकर,
मैं पूरी रात करता हूँ।
तुम्हीं संजीवनी मेरी,
तुम्हीं हर साँस मेरी हो।
लिखो ये जीवनी मेरी,
तुम्हीं अब आस मेरी हो।
पहुँचती राह सब तुम तक,
मैं रस्ते रोज चलता हूँ।
तेरे ही स्वप्न में जाकर,
मैं पूरी रात करता हूँ।
***
19/01/2015
~~~~~~~~~ अंगिरा प्रसाद मौर्य।
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