वर दे हमको वर दे हमको,
कविताओं के स्वर दे हमको,
हंसवाहिनी माता मेरी,
शब्द-सुसज्जित कर दे हमको।
कोई पूँछे जो तुझको भी,
भले ना जाने वो खुद को भी,
शब्दों में ही दर्शा दूँ मैं,
शंका रहे न एक कण को भी।
वाल्मीकि बतालऊँ क्या अब,
कालिदास मीरा तुलसी सब,
सभी शरण तेरे थे माता,
ऐसा ही एक घर दे हमको।
शब्द-सुसज्जित कर दे हमको।
क्रांति यहाँ कण कण में लाऊँ,
भला करन को मै बलि जाऊँ,
ऐसा एक वरदान दो माता,
दुराचार को मार गिराऊँ।
हिन्द का स्वर्णिम चित्र बनाऊँ,
विश्व में इसका इत्र कहाऊँ,
महिमा तेरी मैं नित गाऊँ,
स्वरों का ऐसा पर दे हमको।
शब्द-सुसज्जित कर दे हमको।
………जय माँ शारदे………
~~~~~~~~~अंगिरा प्रसाद मौर्या
दिनाँक:- ०९/०४/२०१४
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