हमारे अनुसार एक प्रश्न एवं उत्तर :-
प्रश्न:- नित्य-योग्य एवं उत्तम कोटि के फल मीठे ही क्यूँ होते हैं ?
उत्तर:- जिस प्रकार अंधकार का अस्तित्व प्रकाश से है एवं झूठ का अस्तित्व सत्य से है, ठीक उसी प्रकार तीखे का अस्तित्व मीठे से है। परन्तु अभी प्रश्न इस उत्तर को स्पष्ट स्वीकृत नहीं देता ।
मीठा:- वह वस्तु या तत्व जिसे चबाने,खाने या पीने से स्वाद का गुण जिह्वा को प्यारा हो एवं तृप्ति अथवा तृप्ति का आभास हो जाए तथा किसी भी इन्द्रिय को क्षति ना पहुँचे,निःसंदेह वही मीठा है।
तीखा/कड़वा:- वह वस्तु या तत्व जिसे योग्य मात्रा से ज्यादा उपयोग में लाने से प्रत्यक्ष इन्द्रिय क्षति महसूस/आभास हो वही तीखा या कड़वा कहलाता है ।
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चूँकि संसार की प्रत्येक वस्तुएँ ईश्वर द्वारा प्रदत्त हैं,हम एवं हमारी इन्द्रियाँ भी। ईश्वर के किसी भी वस्तु को अकारण क्षति ना पहुँचे तथा नित्य-योग्य फल देने वाले जीव(पेडों) से किसी को द्वेष ना हो। इसलिए नित्य-योग्य एवं उत्तम फल मीठे होते है।
……………जय श्री कृष्णा……………
……………Hare Krishna……………
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