अब एक नजर प्रतिद्वंदियों के ओर डालते हैं। दो प्रतिद्वंदी यदि आपस में लड़ रहे हों तो उसमे से जो वीर हो जो जीतने लायक हो उसे चाहिए की यदि वह क्षमा दान देकर आपस में समझौता कर लें तो उचित होता है। परन्तु अहंकार वस जो अपने से भी वीर पुरुष को धमका कर क्षमा करने की पुष्टि करता है वह अनुचित है क्योंकि क्षमा वीर को ही सोभा देती है। वीरता सिर्फ बाहुबल से ही नहीं आँकी जा सकती।
वीर का तो सबसे बड़ा लक्षण यह होता है कि वह धीर(धैर्यवान) होता है। इसके साथ साथ वह अपनी जगह पर अटल रहता है। वह अहंकार के वेग में लडखडाता नहीं। उसके चेहरे पर सदैव शान्ति का वास होता है। इसी प्रकार और भी कई लक्षण हैं वीर के।
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रविवार, 8 दिसंबर 2013
उचित एवं अनुचित
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