शनिवार, 30 जुलाई 2016

शुभ संध्या

कुछ तुम भी बताओ,

कुछ हम भी बताएं,

आओ बैठ जाओ,

गीत गुनगुनाओ,

उसे हम भी सुनेंगे,

ये हवा भी सुनेगी,

ये शाम है सुहानी,

अब हमारी कहानी,

तुम पर है अटकी,

हिम्मत करो थोड़ा,

कुछ कर दो इशारे,

कुछ खींच दो रेखाएँ,

जो हमको समझ आये,

शुरुआत हमने की है,

हवा तुम बस दे दो,

हम बहते चले जाएँ,

हम बहते चले जाएँ,

हम कहाँ तक है पहुँचे,

न हमको पता हो ,

न तुमको पता हो,

हम बहते चले जाएँ,

हम बहते चले जाएँ !

दिनाँक :- ३०/०७/२०१६

–----------– अंगिरा प्रसाद मौर्य

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